उदय बुलेटिन
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फिल्म सरकार में अमिताभ बच्चन
फिल्म सरकार में अमिताभ बच्चन |Google
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राजनीति में ना होते हुए भी राजनीति का अहम हिस्सा रहे हैं अमिताभ बच्चन, ये रहा सबूत 

ट्विटर पोस्ट के जरिए अमिताभ बच्चन राजनीति में अपनी दिलचस्पी जाहिर करते रहते हैं। 

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

एक समय था जब बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन का देश के सबसे बड़े राजनीतिक घराने यानी की गांधी परिवार से सीधे ताल्लुकात थे। राजीव गांधी और अमिताभ बच्चन की दोस्ती की मिशालें दी जाती थी। बताया जाता है जब पहली बार सोनिया मायनो राजीव गांधी से शादी करने के लिए इटली से भारत आई तो उनका ठिकाना बच्चन परिवार था। उस दौर में अमिताभ कांग्रेस और गांधी परिवार के शीर्ष पर विराजमान थे। उन्होंने कई बार कांग्रेस के लिए उत्तर प्रदेश में प्रचार किया यहां तक की अमिताभ प्रयाग राज (इलाहाबाद) से सांसद भी बने। लेकिन समय के साथ-साथ उनके रिश्ते कमजोर हो गए। इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की मौत के बाद ये पारिवारिक दोस्ती लगभग ख़त्म हो गई।

कांग्रेस से दूरियां बढ़ने के बाद बच्चन परिवार का झुकाव समाजवादी पार्टी की तरह हुआ। जया बच्चन समाजवादी पार्टी से लोकसभा सदस्य हैं और राजनीति में काफी मुखर हैं। बच्चन परिवार को कई बार समाजवादी पार्टी के कार्यक्रम में देखा भी गया है। जया समाजवादी पार्टी के लिए प्रचार भी करती हैं। लेकिन कांग्रेस से दूर जाने के बाद अमिताभ को किसी और पार्टी से साठ-गाठ करते नहीं देखा गया।

2017 में जब राहुल गांधी नए-नए कांग्रेस अध्यक्ष चुने गए थे जब अमिताभ ने उन्हें ट्विटर पर फॉलो किया, राहुल के साथ ही उन्होंने कांग्रेस के और भी कई बड़े नेताओं को फॉलो किया था। जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर से चर्चा शुरू हो गई कि बच्चन और गांधी परिवार की दोस्ती दोबारा देखने को मिल सकती है। बात यहां तक बढ़ गई कि लोगों ने ये उम्मीद लगाने शुरू कर दिए कि जिस तरह की दोस्ती अमिताभ और राजीव में थी वहीं दोस्ती अभिषेक और राहुल गांधी के बीच भी देखने को मिले। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अमिताभ कभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए। लेकिन पर्दे के पीछे वे जरूर एक सफल राजनीतिकार हैं।

आज अमिताभ बच्चन राजनीतिक के मैदान में ना सही पर ट्विटर पर बड़े-बड़े राजनीतिज्ञों को टक्कर देने की हिम्मत रखते हैं। उनके ट्वीटस ने बड़े-बड़ों धुरंधर नेताओं की बोलती बंद कर दी है। रोजगार का मुद्दा हो या इंसानियत का या फिर धार्मिक विवाद अमिताभ खुल कर अपील इक्षा जाहिर करते हैं। हाल ही में उन्होने ट्वीट करते हुए लिखा था कि "महंगाई बेशक फर्श से अर्श तक पहुच गई, पर जमीर इंसान का आज भी सस्ता है।"

इससे पहले भी अमिताभ ने राजनीती पर कटाक्ष करते हुए कई ट्वीट्स लिखे हैं जैसे कि "लोगों का समझना कम हो गया और समझाना ज़्यादा... इसलिए मुद्दों का सुलझना कम हो गया है और उलझना ज़्यादा .." अमिताभ के ट्वीट्स में राजनीति के प्रति उनकी गहरी समझ साफ-साफ नजर आती है। उनकी ट्वीट्स की टाइमिंग भी जबरदस्त हैं और लोगों को उनका सेन्स ऑफ़ ह्यूमर भी बहुत पसंद आता है।

खैर, अमिताभ अगर आज भी राजनीति में उतने ही एक्टिव होते तो शायद वे फ़िल्मी पर्दे से दूर हो गए होते। आज अमिताभ एक अविस्मरणीय नेता ना सही, लेकिन एक अद्भुत अभिनेता जरूर हैं।