उदय बुलेटिन
www.udaybulletin.com
वाराणसी लोकसभा चुनाव 
वाराणसी लोकसभा चुनाव |Twitter
इलेक्शन बुलेटिन

इन दिनों क्या कर रहे हैं पीएम मोदी के खिलाफ वाराणसी से पर्चा भरने वाले बर्खास्त BSF जवान तेज बहादुर यादव

वाराणसी में 19 मई को लोकसभा चुनाव होना है। 

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

सुप्रीम कोर्ट ने वाराणसी से चुनाव लड़ रहे समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार तेज बहादुर यादव की याचिका ख़ारिज कर दी है। तेज बहादुर ने निर्वाचन आयोग द्वारा उनके नामांकन को रद्द किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट में इसकी शिकायत की थी।

जिसे सुप्रीम कोर्ट ने यह बोलते हुए खारिज कर दिया कि जनहित याचिका के तौर पर इसमें दखल देने का कोई आधार ही नहीं है। याचिका रद्द होने के साथ-साथ तेज बहादुर का वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने की रही-सही उम्मीदों पर भी पानी फिर गया है।

नामांकन रद्द होने के बाद तेज बहादुर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। वे लोगों से कहते फिर रहे हैं कि "आज चुनाव लड़ने नहीं दे रहे हैं, कल वोट देने नहीं देंगे, परसो कहेगें ये देश अंबानी का है, जागो वोटर जागो।”

चुनाव ना लड़ पाने की बौखलाहट में तेज बहादुर की नींदें उड़ गई हैं। और अब वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर एक से बढ़ कर एक आरोप लगा रहे है।

तेज बहादुर लोगों से कह रहे हैं कि "मोदी जी अम्बानी-अडानी के रोबोट हैं, जो वे लिख के देते हैं मोदी जी वही अपनी रैलियों में पढ़ते हैं, कुछ अलग बोलने में कांपने लगते हैं।"

तेज बहादुर ने लोगों से कहा कि "मोदी जी दोगले प्रधानमंत्री हैं , जो महात्मा गांधी की भी पूजा करते हैं हैं और गोडसे की भी। इन्हें किसानों और जवानों से नहीं इन्हें कुर्सी और पैसा प्यारा है।"

क्या है मामला

तेज बहादुर यादव वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ना चाहते थे। उन्होंने बतौर निर्दलीय उम्मीदवार 28 अप्रैल को अपना नामांकन दाखिल किया। नामांकन दाखिल होने के दूसरे दिन समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने उनसे मुलाकात की और उन्हें समाजवादी पार्टी में शामिल कर लिया।

इस सीट पर पहले समाजवादी पार्टी की तरफ से शालिनी यादव मैदान में थीं, लेकिन पार्टी ने ऐन मौके पर शालिनी यादव की जगह तेज बहादुर यादव को अपना उम्मीदवार बना लिया और BSF से बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव को वाराणसी से प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ उतारा दिया।

1 मई तक था समय

29 अप्रैल को तेज बहादुर यादव ने निर्वाचन आयोग के समक्ष समाजवादी पार्टी की टिकट से दोबारा नामांकन दाखिल किया। 30 अप्रैल को जिला निर्वाचन आयोग ने तेज बहादुर यादव को नोटिस भेजा जिसमें उनसे कहा गया कि वो BSF से एक चिट्टी लेकर आएं जिससे पता चले कि उन्हें BSF से क्यों बर्खास्त किया गया था।

निर्वाचन आयोग की तरफ से उन्हें जो चिट्टी मिली उसमें उनकी अगली उपस्थिति 1 मई 2109, यानी 90 सालों के बाद की थी। उन्हें बाद में दूसरा नोटिस दिया गया जिसमें बताया गया कि पहले दी गई तारीख गलत थी और उन्हें 1 मई 2019 को 11 बजे तक उपस्थित होना है।

1 मई को तेज बहादुर यादव निर्वाचन आयोग के समक्ष चिट्टी लेकर आने में असफल रहे। जिसके बाद निर्वाचन आयोग ने उनका नामांकन रद्द कर दिया। नामांकन रद्द होने के बाद तेज बहादुर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए और निर्वाचन आयोग के खिलाफ शिकायत की।

 तेज बहादुर 
तेज बहादुर 
Google

कोर्ट ने क्या कहा

और अब सुप्रीम कोर्ट ने भी तेज बहादुर यादव की याचिका ख़ारिज कर दी है और उनका नमांकन रद्द हो गया है। याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें इसमें दखल देने का कोई अधार नहीं मिला है। जनहित याचिका के तौर पर इसमें दखल देने का कोई आधार ही नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट में तेज बहादुर यादव की पैरवी कर रहे प्रशान्त भूषण ने कहा कि वो चुनाव को चुनौती नही दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारा बस ये कहना है कि तेज बहादुर का नामांकन गलत तरीके से और गैरकानूनी तरीके से खारिज हुआ है और उन्हें 19 मई को चुनाव लडने की इजाजत दी जाए। प्रशांत भूषण ने कहा कि तेज बहादुर यादव ने अपनी बर्खास्तगी का आदेश नामांकन के साथ संलग्न किया था। हमें जवाब रखने का पूरा मौका नही दिया गया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा हम इसमें कुछ नहीं कर सकते हैं।

आपको बता दें कि, तेज बहादुर यादव को BSF से अनुशासनहीनता के लिए बर्खास्त किया गया था।

अपने वीडियो के कारन फेमस हुए थे तेज बहादुर

2017 में तेज बहादुर यादव ने सोशल मीडिया में अपना एक वीडियो शेयर किया था। जो काफी वायरल हुआ था। इस वीडियो में तेज बहादुर सेना में मिल रहे खाने की शिकायत कर रहे थे। वो बता रहे थे कि सेना में ख़राब गुणवत्ता वाला खाना फैजियों को दिया जाता है। उन्होंने खाने की शिकायत सेना के बड़े अधिकरियों से और गृहमंत्रायल से भी की थी लेकिन किसी ने कुछ नहीं किया। इस वीडियो की जाँच के बाद उन्हें BSF से बर्खास्त कर दिया गया था।