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बसपा प्रमुख मायावती
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मायावती ने बताया कैसे मसूद अजहर का इस्तेमाल बीजेपी ने वोट बटोरने के लिए किया

मायावती ने कहा आतंकवाद और नक्सलवाद निपटने में फेल है बीजेपी। वोट बटोरने के लिए करती है ऐसा काम। 

AKANKSHA MISHRA

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संयुक्त राष्ट्र द्वारा "जैश-ए-मोहम्मद’’ सरगना मसूद अजहर को ‘‘वैश्विक आतंकवादी’’ घोषित करने के बाद भारत में राजनीती तेज हो गई है। जहां बीजेपी इसे भारत के लिए यह एक बड़ी कूटनीतिक जीत बता रही है। वहीं तमाम विपक्षी पार्टी इसे वोट बटोरने का जरिया बता रही हैं।

बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा है कि "पहले भाजपा सरकार ने मसूद अज़हर को अतिथि बनाया, उसकी खातिरदारी की फिर विदेश जा कर छोड़ आए। और अब चुनाव के समय वे मसूद अज़हर के नाम पर वोट बटोरने की कोशिश कर रहे हैं, यह निंदनीय है।"

मायावती ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि मसूद अज़हर को ‘‘वैश्विक आतंकवादी’’ घोषित करना बीजेपी का "राजनितिक षड़यंत्र", बीजेपी पहले भी कई बार ऐसा कर चुकी है। बीजेपी ने ही मसूद अज़हर को कंधार छोड़ा था ,अब उसके नाम पर वोट मांग रही है।

मायावती द्वारा बीजेपी पर लगाया गया यह आरोप नया नहीं है। इससे पहले भी मायावती ने आतंकवाद, नक्सलवाद व अराजकता के नाम पर बीजेपी को हमेशा कटघरे में खड़ा किया है। मायावती ने पीएम मोदी पर आरोप लगाते हुए ये भी कहा है कि बीजेपी आतंकवाद से निपटने में बुरी तरह से विफल रही है। इसके बावजूद पीएम मोदी उल्टा आरोप लगा रहे हैं कि हमारी सरकारें आतंकवाद पर नरम रही हैं। अगर ऐसा होता तो हमारी सरकारों के कानून द्वारा कानून के राज में हिंसक वारदातें कम व बीजेपी शासन में ज्यादा क्यों?

इसके बाद मायावती ने पीएम मोदी पर दूसरा आरोप लगाते हुए कहा "कल यहां उप्र में पीएम मोदी ने अपनी चुनावी जन सभा में खास कर बी.आर. आंबेडकर जी को लेकर बसपा के ऊपर जो टिका-टिप्पणी की है। आंबेडकर जी बीजेपी, कांग्रेस या अन्य विरोधी पार्टी के लिए ये वोट की राजनीती हो सकती है। किन्तु बसपा के लिए वह आत्मसम्मान है।"

आपको बता दें कि, आतंकी मसूद अज़हर पर प्रतिबंद लगाने का प्रस्ताव भारत सबसे पहले 2009 में लाया था। फिर 2016 में भारत ने अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस के साथ मिलकर संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध परिषद के समक्ष दूसरी बार प्रस्ताव रखा।

इन्हीं देशों के समर्थन के साथ भारत 2017 में तीसरी बार यह प्रस्ताव लाया। हालांकि इन सभी मौकों पर चीन ने प्रतिबंध समिति द्वारा इस प्रस्ताव को स्वीकार किए जाने में अड़ंगा डाल दिया।

अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित कराने के अंतरराष्ट्रीय दबाव के मद्देनजर फ्रांस और ब्रिटेन के समर्थन से अमेरिका ने सीधे सुरक्षा परिषद में एक मसौदा प्रस्ताव लाया था।

संयुक्त राष्ट्र की प्रधान इकाई में राजनयिकों ने यह चेतावनी दी थी कि यदि चीन ने अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित कराने में अड़ंगा डालना जारी रखा तो सुरक्षा परिषद के जिम्मेदार सदस्य देश अन्य कार्रवाई करने के लिए मजबूर होंगे।