उदय बुलेटिन
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PM MODI IN AYODHYA
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इलेक्शन बुलेटिन

क्या चुनाव के वक्त फिर याद आए रामलला, पीएम मोदी के अयोध्या दौरे के क्या है मायने ?

फैजाबाद लोकसभा सीट पर दोबारा कमल खिला पाएगी बीजेपी?

Anuj Kumar

Anuj Kumar

वैसे तो देश में चुनाव के वक्त बहस के लिए कई सारे मुद्दे होते है। लेकिन पिछले दो दशकों से जो मुद्दा हमेशा ही चर्चाओं का विषय बना रहा है वो है राम मंदिर। लोकसभा चुनाव के पिछले चार चरणों में राम मंदिर का जिक्र किसी भी पार्टी ने नहीं किया है खास तौर पर बीजेपी ने। लेकिन अब एक बार फिर राम मंदिर का मुद्दा सियासी गलियारों में गूंजने वाला है।

दरअसल, 1 मई को पीएम मोदी अयोध्या जाएंगे। पांचवे चरण में यानी 6 मई को फैजाबाद लोकसभा सीट पर वोटिंग होनी है। पीएम मोदी अम्बेडकर नगर और अयोध्या के बीच पड़ने वाला इलाका गोसाईंगंज के मया बाजार में चुनावी सभा को संबोधित करेंगे। लेकिन जिस बात पर सभी की निगाहें टिकी है वो है राम मंदिर। पीएम मोदी अयोध्या तो जा रहे है लेकिन क्या रामलला के दर्शन करेंगे, इस पर अब भी सस्पेंस बना हुआ है।

PM MODI AND RAM MANDIR
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क्या पीएम मोदी धर्म संकट में है !

वैसे तो पीएम मोदी राजनीति के वो धुरंधर है जिन्हें पता है कि कब, कैसे, कौन सी बात कहां बोलनी है। लेकिन अयोध्या के इस दौरे पर पीएम भी धर्म सकंट में होगें। दरअसल, पीएम मोदी अगर अयोध्या में रामलला के दर्शन करते हैं तो उन पर ये आरोप लगना तय है कि चुनाव के वक्त बीजेपी को राम याद आ रहे हैं... और अगर नहीं करते है तो अयोध्या के साधु संत बीजेपी से नाराज हो सकते है... जिसका नुकसान बीजेपी को लोकसभा चुनाव में हो सकता है। पीएम मोदी अपने पांच साल के कार्यकाल में एक बार भी अयोध्या नहीं गए। ऐसे में अगर मोदी रामलला के दर्शन करते है तो ये साफ हो जाएगा कि बीजेपी राम मंदिर मुद्दे पर केवल राजनीति कर रही है।

बीजेपी के लिए राम मंदिर क्यों है जरूरी

1980 में बीजेपी का गठन होने के 4 साल बाद 1984 में चुनाव हुए, तो बीजेपी को केवल 2 सीटे ही मिली। ये बीजेपी की करारी हार थी। लेकिन 1989 में पालमपुर अधिवेशन में बीजेपी ने राम मंदिर को अपने मेनिफेस्टो में जगह दी। इसका फायदा बीजेपी को हुआ और वो 2 सीट से बढ़कर 85 सीट पर पहुंच गई... इतना ही नहीं बीजेपी ने कांग्रेस को सत्ता में आऩे से रोकने के लिए वी. पी. सिंह सरकार को समर्थन दे दिया। इसके बाद से ही बीजेपी लगातार राम मंदिर के मुद्दे को जोर-शोर से उठाने लगी। 1991 में लाल कृष्ण आडवाणी ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर से रथ यात्रा शुरू की जिसका फायदा भी बीजेपी को हुआ। 1991 में यूपी में बीजेपी ने 221 सीट जीतकर सरकार बनाई। इसके बाद मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में भी बीजेपी सरकार बनी... उसके बाद से ही बीजेपी का सियासी सफर रुका नहीं बल्कि आगे बढ़ता ही चला गया।

लेकिन वक्त के साथ साथ बीजेपी ने राम मंदिर के मुद्दे को पीछे छोड़ दिया। यही कारण है कि 2004 में बीजेपी ने मेनिफेस्टो में राम मंदिर पर 62 शब्द खर्च किए थे। तो वही 2019 के चुनाव में बीजेपी ने राम मंदिर को आस्था का विषय बताते हुए 40 वें पन्ने पर जगह दी और मात्र 32 शब्दों में ही राम मंदिर के मुद्दे को खत्म किया। इसका साफ मतलब है कि बीजेपी अब राम मंदिर के मुद्दे को और हवा नहीं देना चाहती।

ऐसे में पीएम मोदी के अयोध्या दौरे को लेकर राजनीतिक पंडित अपनी अपनी तरफ से कयास लगा रहे हैं। अब ये देखना दिलचस्प होगा कि 1 मई को पीएम मोदी का अयोध्या दौरा कैसा रहेगा।