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डिंपल यादव ने मंच पर छुए मायावती के पैर, क्या हैं इसके सियासी मायने ?

कन्नौज में मायावती ने मांगें डिंपल यादव के लिए वोट

Anuj Kumar

Anuj Kumar

यूपी में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का गठबंधन अब रिश्ते के बंधन की डोर तले बुना जा रहा है। दरअसल, 25 अप्रैल को जब कन्नौज में मायावती डिंपल यादव के लिए वोट मांगने गई। तो एक अद्भुत नजारा देखने को मिला। मंच पर जब मायावती लोगों का अभिवादन कर रही थी उसी दौरान डिंपल यादव ने मायावती के पैर छूकर उनका आशिर्वाद लिया।

सियासत में हर चीज के अपने मायने होते हैं। मंच पर मायावती के पैर छूना हो सकता है किसी को आम बात लगे तो किसी को राजनीति। लेकिन चुनाव के वक्त नेताओं के हर एक एक्शन का कनेक्शन वोट से होता है।

मायावती दलित समुदाय से है और डिंपल यादव पिछड़ी जाति की। ऐसे में मायावती के पैर छूकर आशीर्वाद लेने से दलितों के बीच समाजवादी पार्टी की छवि बेहतर होगी। यूपी में दलितों की आबादी को ध्यान में रखते हुए इसका फायदा आने वाले चुनावों में समाजवादी पार्टी को जरूर होगा। हालांकि दोनों पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच की जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है.

कार्यकर्ताओं के बीच नाराजगी अब भी

दरअसल, यूपी में पिछले लंबे समय से चला सियासी युद्ध(एसपी और बीएसपी के बीच) के कारण दोनों पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच अब भी धमासान जारी है। जमीनी स्तर पर अब भी कार्यकर्ताओं के बीच कैंडिडेट को लेकर एक मत नहीं है। जिस सीट पर एसपी के कैंडिडेट है वहां बीएसपी कार्यकर्ता खुश नहीं हैं, तो जहां बीएसपी उम्मीदवार है वहां एसपी कार्यकर्ता की नाराजगी है। ऐसे में महागठबंधन चाहे जितना भी मंच पर एक साथ होने का ढोंग रचा ले। लेकिन अगर कार्यकर्ताओं के बीच धमासान जारी रहेगा तो चुनाव में गठबंधन को नुकसान होगा। यही कारण है कि मंच से लगातार अखिलेश यादव हो या चाहे मायावती कार्यकर्ताओं के बीच ये ही संकेत पहुंचाने में लगे हैं कि हम एक हैं।

एसपी बीएसपी के गठबंधन को मजबूत दिखाने के लिए परिवारवाद के शिकंजे में फंसी समाजवादी पार्टी हर रैली में मायावती के पोस्टर पर नीले रंग के बैगग्राउंड का भी ध्यान रखती है। इस चुनाव में बीएसपी और एसपी के बीच हुआ गठबंधन अब रिश्तों के तानेबाने के इर्द-गिर्द बुना जा रहा है।