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फिरोजाबाद लोकसभा सीट: चाचा-भतीजे के बीच इस सियासी लड़ाई में किसका दांव होगा सबसे मजबूत

सियासी शोर गुल और चूड़ियों की खनक से गुलजार है इन दिनों फिरोजाबाद

Anuj Kumar

Anuj Kumar

चूड़ियों के शहर से मशहूर फिरोजाबाद में इन दिनों सियासत बेहद गर्म है। तीसरे चरण में यानी 23 अपैल को इस सीट पर वोटिंग होनी है। इस बार फिरोजाबाद की लड़ाई एक ही परिवार के दो लोगों के बीच है। इस सीट से जहां एक तरह समाजवादी पार्टी से अलग होकर चाचा शिवपाल यादव ने अपना दांवा ठोका है तो वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी की तरफ से अक्षय यादव मैदान में हैं। बीजेपी की तरफ से डॉ चंद्रसेन जादौन उम्मीदवार है। हालांकि नरेंद्र मोदी के नाम पर इनका भी पलड़ा भारी है। ऐसे में यहां का मुकाबला त्रिकोणीय नजर आ रहा है। इस सीट से कुल 6 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

फिरोजाबाद लोकसभा सीट का इतिहास

फिरोजाबाद लोकसभा सीट कभी किसी एक पार्टी की जागीर बन कर नहीं रही। वक्त और मुद्दों के साथ साथ इस सीट पर लोगों का मिजाज भी बदलता रहा। 1957 में हुए यहां पहले चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी ने जीत दर्ज की। 1967 में सोशलिस्ट पार्टी ने इस सीट पर अपना कब्जा जमाया। 1971 में पहली बार कांग्रेस ने इस सीट पर जीत दर्ज की।

हालांकि 1977 से 1989 के बीच इस सीट पर हुए चार चुनावों में कांग्रेस केवल एक बार की जीत दर्ज करने में कामयाब हुई। लेकिन 90 के दशक में राम मंदिर आंदोलन के दौरान इस सीट पर बीजेपी का कब्जा रहा., 1991 के बाद लगातार तीन बाद हुए चुनाव में इस सीट से बीजेपी के प्रभु दयाल कठेरिया ने जीत की हैट्रीक लगाई। लेकिन 1998 के बाद से बीजेपी आजतक इस सीट पर जीत दर्ज करने में कामयाब नहीं रही।

1999 और 2004 में इस सीट से समाजवादी पार्टी की तरफ से रामजी लाल सुमन चुनाव जीते। 2009 में इस सीट से अखिलेश यादव ने जीत दर्ज की। लेकिन बाद में उन्हें ये सीट छोड़नी पड़ी। इसके बाद हुए उपचुनाव में इस सीट पर राज बब्बर ने जीत दर्ज की। 2014 के चुनाव में मोदी लहर के बावजूद इस सीट पर समाजवादी पार्टी की तरफ से अक्षय यादव ने जीत दर्ज कर पहली बार सांसद पहुंचे।

जातिगत समीकरण

2011 जनगणना के आकड़ों के अनुसार फिरोजाबाद की कुल जनसंख्या में से 15 फीसदी मुस्लिम वोटर है.. जो कि निर्णायक भूमिका में है। इसके अलावा इस सीट पर जाट और यादव वोटर्स का समीकरण भी बेहद खास है।

फिरोजाबाद में चुनावी समीकरण के बीच अब ये देखने वाली बात होगी कि इस बार फिरोजाबाद की जनता किन मुद्दों के साथ किस उम्मीदवार को संसद भेजेगी।