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mulayam singh and akhilesh yadav
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लोकसभा चुनाव 2019: मैनपुरी सीट पर मुलायम सिंह यादव को हरा पाना मुश्किल ही नहीं ना मुमकिन है !

मैनपुरी के लोगों के दिलों में बसते हैं मुलायम सिंह यादव

Anuj Kumar

Anuj Kumar

यूपी में तीसरे चरण के चुनाव के मद्देनजर सारी पार्टियों ने कमर कस ली है। 23 अप्रैल को मैनपुरी सहित 10 सीटों पर चुनाव होगा। मैनपुरी लोकसभा सीट यूपी की हाईप्रोफाइल सीटों में से एक है। ये सीट समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है.. ये ही कारण है कि इस सीट से एक बार फिर सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव मैदान में है। बीजेपी के प्रेम सिंह शाक्य को छोड़ दे तो इस सीट पर कोई मुख्य विपक्षी पार्टी ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है... मैनपुरी लोकसभा सीट पर 8 छोटे दल और निर्दलीय मिलाकर कुल 12 उम्मीदवार मैदान में है।

2014 के चुनावी नतीजे

मुलायम सिंह यादव ने 2014 के चुनाव में दो सीटों से चुनाव लड़ा था मैनपुरी और आजमगढ़। साल 2014 में मोदी लहर होने के बावजूद इस सीट पर मुलायम सिंह यादव ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की। मुलायम सिंह यादव ने बीजेपी उम्मीदवार शत्रुध्न सिंह चौहान को 3 लाख 54 हजार वोटों से मात दी थी। जबकि बीएसपी उम्मीवार 1 लाख 42 हजार वोट के साथ तीसरे स्थान पर थे। हालांकि बाद में मुलायाम सिंह यादव ने इस सीट को अपने पोते तेज प्रताप यादव के लिए छोड़ दिया। इसके बाद हुए उपचुनाव में इस सीट पर तेज प्रताप यादव ने बीजेपी उम्मीदवार प्रेम सिंह शाक्य को 3 लाख से ज्यादा वोटों से हराकर जीत दर्ज की। पिछले 24 सालों से इस सीट पर समाजवादी पार्टी का कब्जा रहा है। ऐसे में किसी भी विपक्षी के लिए इस सीट पर जीत दर्ज करना नाकों चने चबाने जैसा होगा।

जातिगत समीकरण

जातिगत समीकरणों की बात करे तो इस सीट पर यादव वोटरों की संख्या बेहद खास है। 13 लाख वोटर्स में से इस सीट पर 35 % यादव है जबकि 29 % राजपूत वोटर्स है। बाकी अन्य जाति के वोटर्स है। ऐसे में बीजेपी के लिए इस सीट पर पार पाना बेहद मुश्किल है।

क्या है समाजवादी पार्टी की रणनीति

मैनपुरी सीट पर अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव का भी बड़ा वर्चस्व रहा है। शिवपाल यादव जब समाजवादी पार्टी के कर्ता-धर्ता थे। उस वक्त मैनपुरी सीट पर जबरदस्त पकड़ थी। शिवपाल यादव अब भी मुलायम सिंह को ही अपना नेता मानते है। अखिलेश यादव जानते है कि मैनपुरी में अगर मुलायम सिंह यादव मैदान में है तो शिवपाल यादव की पार्टी किसी भी उम्मीदवार को यहां से नहीं उतारेगी। यही कारण है कि अखिलेश यादव ने इस सीट से दोबारा नेता जी यानी मुलायम सिंह को उतारा है।

दरअसल, शिवपाल यादव ने अखिलेश से अलग होकर अपनी नई पार्टी बनाई है। मैनपुरी में अगर अखिलेश किसी और को टिकट देते तो शिवपाल यादव किसी न किसी उम्मीदवार को उतारते जरूर। शिवपाल के द्वारा उतारा गया उम्मीदवार जीतता नहीं तो कम से कम समाजवादी पार्टी का वोट जरूर काटता। ऐसे में समाजवादी पार्टी के इस गढ़ में बीजेपी सेंध मारी कर सकती थी। लेकिन अखिलेश के इस दांव के बाद मैनपुरी सीट से मुलायम सिंह को हराना बेहद मुश्किल है।