उदय बुलेटिन
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BJP Rally in Agra
BJP Rally in Agra|google image
इलेक्शन बुलेटिन

लोकसभा चुनाव 2019: जातिगत समीकरणों के बीच क्या बीजेपी आगरा में दोबारा कमल खिलाने में कामयाब होगी ?

ताजनगरी आगरा में क्यों है इस बार का चुनाव दिलचस्प

Anuj Kumar

Anuj Kumar

आगरा यूपी की दलित बहुल सीटों में से एक है। यही कारण है कि मायावती ने अपने प्रचार की शुरूआत इसी सीट से की। 2018 में जब पूरे देश में एससी/एसटी एक्ट में बदलाव को लेकर दलितों में आक्रोश था। इस आक्रोश से आगरा भी अछूता नहीं था। ऐसे में बीएसपी और एसपी गठबंधन के बाद बीजेपी के लिए इस सीट पर दोबारा कमल खिलाना एक चुनौती होगी। 2014 में इस सीट पर बीजेपी के रामशंकर कठेरिया ने जीत दर्ज की थी। इस बार के चुनाव में बीजेपी ने इस सीट से एसपी बघेल को उम्मीदवार बनाया है तो वहीं कांग्रेस की तरफ से प्रीता हरित और महागठबंधन से मनोज सोनी मैदान में है। इस सीट से 9 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं

आगरा लोकसभा सीट का इतिहास

1952 से 1972 तक इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा था। लेकिन 1977 में इमरजेंसी के बाद हुए चुनाव में इस सीट पर भारतीय लोकदल ने जीत दर्ज की। 1980 और 1984 में एक बार फिर कांग्रेस ने इस सीट पर वापसी की। लेकिन इसके बाद से कांग्रेस इस सीट पर दोबारा वापसी नहीं कर पाई। 1989 में जनता दल ने कब्जा किया. तो वहीं 1991,1996,1998 में बीजेपी ने इस सीट से जीत दर्ज की। लेकिन 1999 और 2004 में समाजवादी पार्टी की तरफ से इस सीट पर राज बब्बर मैदान में उतरे और विरोधियों को चीत करते हुए इस सीट पर जीत दर्ज कर समाजवादी पार्टी का खाता खोला। फिलहाल राजबब्बर यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष है... 2009 और 2014 में इस सीट पर बीजेपी ने दोबारा वापसी की बीजेपी की तरफ से राम शंकर कठेरिया जीतने में कामयाब हुए।

जातिगत समीकरण

आगरा की जातिगत समीकरण बेहद रोचक है। इस सीट पर मुस्लिम और दलित 37 फीसदी है ये ही कारण है इस सीट पर बीएसपी की नजर बनी हुई रहती है। दलित बहुल इलाके होने के बाद भी इस सीट बीएसपी को जीत का सवाद चखने को नहीं मिला है.. ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा की इस बार की समीकरणों के बीच क्या इस सीट पर महागठबंधन का कब्जा रहता है या फिर बीजेपी एक बार फिर इस सीट पर जीत का हैट्रिक लगाने में कामयाब होगी।