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हेमा मालिनी
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इलेक्शन बुलेटिन

लोकसभा चुनाव 2019: मथुरा लोकसभा सीट का सियासी गणित यहां समझिए

क्या एक बार फिर हेमा मालिनी जीतेंगी मथुरा से बाजी

Anuj Kumar

Anuj Kumar

भगवान श्री कृष्ण की नगरी मथुरा इन दिनों सियासत का अखाड़ा बनी हुयी है। मथुरा में बीजेपी की तरफ से बॉलीवुड की ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी मैदान में है तो वहीं महागठबंधन से कुंवर नरेंद्र सिंह और कांग्रेस की तरफ से महेश पाठक मैदान में है। मथुरा लोकसभा सीट से इस बार कुल 12 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं।

मथुरा लोकसभा सीट का राजनीतिक इतिहास

आजादी के बाद मथुरा में हुए पहले दो चुनावों में निर्दलीय प्रत्याशी ने जीत दर्ज की। लेकिन 1962 से 1977 तक इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा। 1977 में हुए चुनाव में सत्ता विरोधी लहर में ये सीट भारतीय लोकदल के हाथ लगी। 1980 में पहली बार जनता दल ने इस सीट पर अपना खाता खोला।

1984 में कांग्रेस ने एक बार फिर इस सीट पर वापसी की। लेकिन उसके बाद कांग्रेस को इस सीट पर जीत के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। 1989 में जनता दल ने जीत दर्ज की। 1991, 1996,1998,1999 में इस सीट पर बीजेपी का कब्जा रहा लेकिन 2004 के चुनाव में मानवेंद्र सिंह ने कांग्रेस को इस सीट से जीत दिलाई। 2009 में आरएलडी के जंयत चौधरी ने इस सीट पर जीत दर्ज की। उन्हें बीजेपी का समर्थन प्राप्त था। 2014 के चुनाव में बीजेपी ने इस सीट से हेमा मालिनी को उतारा और मोदी लहर में हेमा मालिनी ने इस सीट पर बड़े अंतर से जीत दर्ज की।

चुनावी समीकरण

पश्चिमी यूपी की इस सीट पर जाट और मुस्लिम मतदाताओं का वर्चस्व है। 2014 के चुनाव में मुस्लिम वोट बट जाने की वजह से जाटों ने एक तरफा बीजेपी को वोट किया था। यही कारण है कि इस बार के चुनाव में इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है।

हालांकि मथुरा के सियासी गलियायों में बीजेपी की हवा बह रही है, लोग अब भी मोदी के नाम पर वोट देने को तैयार है लेकिन कहते है कि राजनीतिक अनिश्चिताओं का खेल है ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि मथुरा की जनता क्या एक बार फिर बीजपी के पक्ष में वोट देती है या फिर महागठबंधन के पक्ष में।