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MEERUT LOK SABHA ELECTION 
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इलेक्शन बुलेटिन

लोकसभा चुनाव 2019: क्यों है राजनितिक नजरिए से मेरठ लोकसभा सीट खास

मेरठ का जातिगत समीकरण सबसे रोचक है

Anuj Kumar

Anuj Kumar

पश्चिमी उत्तर प्रदेश का केंद्र माने जाने वाली सीट मेरठ राजनीतिक नजरिए से भी बेहद खास है। जहां एक तरफ मेरठ में बीजेपी ने पिछले दो बार से सांसद और संघ की पृष्ठभूमि से आने वाले नेता राजेद्र अग्रवाल पर भरोसा जताया है तो वहीं दूसरी तरफ एसपी और बीएसपी ने हाजी याकूब कुरैशी और कांग्रेस ने बाबू बनारसी लाल के बेटे हरेंद्र अग्रवाल को उतारा है। शिवपाल यादव की पार्टी की तरफ से नासीर अली तो शिवसेना की तरफ से आर.पी अग्रवाल मैदान में है।

बीजेपी इस सीट पर जीत की हैट्रिक लगाने का दावा कर रही है तो वहीं एसपी बीएसपी के लिए मेरठ लोकसभा सीट राजनीति की नई प्रयोगशाला होगी। ऐसे में मेरठ में एक बार फिर ध्रुवीकरण की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

मेरठ की जातिगत समीकरण

मेरठ सीट कई मायनों में बेहद खास है, सबसे रोचक बनाती है इस सीट की जातिगत समीकरण। मेरठ में 2.25 लाख वैश्य वोटर है, गुर्जर 90 हजार, ब्राहम्ण डेढ़ लाख, ठाकुर 60 हजार, जाट 1 लाख, पंजाबी 50 हजार इसके अलावा इस सीट पर मुस्लमानों का भी अच्छा खासा प्रभाव है । मुस्लिम यहां 5 लाख, जबकि दलित 4 लाख , पिछड़े और अन्य वर्ग 4 लाख है। मेरठ में कुल वोटरों की संख्या 18 लाख 94 हजार 144 है। इनमें से करीब 10 लाख पुरूष है तो लगभग 9 लाख महिलाएं है।

जातिगत समीकरण को साधते हुए ही सपा और बसपा ने इस सीट से मुस्लिम कैंडिडेट को उतारा है। ऐसे में ये स्वाभाविक है कि मेरठ में हिन्दू-मुस्लिम के नाम पर भी वोट मांगे जा रहे है।

क्यों है मेरठ सीट खास

दरअसल, 2014 के चुनाव में पीएम मोदी ने यूपी में मिशन 70 + की शुरूआत मेरठ से ही की थी। मेरठ में हुयी जनसभा में करीब 20 लाख से ज्यादा लोग पहुंचे थे। यूपी में मोदी लहर की शुरुआत इसी सीट से हुयी थी। पश्चिमी यूपी में जहां बीजेपी राजनीतिक रूप से कमजोर हुआ करती थी। उन सीटों पर कमल खिलाकर बीजेपी ने 2014 में सभी को चौकाया था।