उदय बुलेटिन
www.udaybulletin.com
modi and atal 
modi and atal |google image
इलेक्शन बुलेटिन

लोकसभा चुनाव 2019: क्या बीजेपी 1999 के तर्ज पर लड़ेगी 2019 का चुनाव

26 फरवरी 2019 ये वो दिन था। जब सारे देशवासियों का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक सभी भारतीय वायु सेना और प्रधानमंत्री द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना कर रहे हैं।

Anuj Kumar

Anuj Kumar

सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से पूरे देश में जश्न का माहौल है। लेकिन क्या आपको पता है ये दौर कही न कही 1999 में हुए लोकसभा चुनाव के जैसा ही है। उस वक्त भी कुछ इसी तरह का जोश देशवासियों के सीने में था। आज सिलसिले वार तरीके से जानेगे कि आखिर क्या समानता है 1999 और 2019 के राजनीति गतिविधियों में।

1998 में जब अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार बनी थी, तो महज 13 महीनों के अंदर ही सरकार गिर गई थी। लेकिन इस बीच हुए कारगिल युद्ध के बाद अटल बिहारी वाजपेयी एक मजबूत इरादों वाले दमदार नेता बन कर उभरे थे। कारगिल युद्ध में अटल सरकार द्वारा लिए गए फैसले और भारतीय सेना के पराक्रम ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया था। जिसकी सराहना पूरे देश में हुई थी। उस वक्त भी कुछ इसी तरह देशवासियों में देशभक्ति की लहर दौर गई थी। इसके बाद1999 के आम चुनाव हुआ। जहां बीजेपी को जबरदस्त फायदा हुआ। बीजेपी 182 सीटें से साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।

मौजूदा वक्त में भी प्रधानमंत्री के फैसले और वायु सेना के जवान द्वारा किए गए पराक्रम पर पूरे देश को नाज है। ये दौर भी 1999 की याद दिलाता है। लेकिन इसका कितना फायदा 2019 के आम चुनाव में होगा ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

लेकिन इसके साथ-साथ 1999 में हुए आम चुनाव की एक और बात है जो 2019 चुनाव के साथ आपको जोड़ेगी। अप्रैल 1998 जब कांग्रेस की सत्ता सोनिया गांधी के हाथ आई। यानी सोनिया गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया। इसे लेकर भी पार्टी में मतभेद रहे। जिस वजह से पार्टी टूटी भी। 1999 लोकसभा चुनाव कांग्रेस अध्यक्ष को रूप में सोनिया गांधी का पहला लोकसभा चुनाव था। इस चुनाव में सोनिया गांधी दो जगह से चुनाव लड़ी थी। हालांकि सोनिया गांधी उस वक्त दोनों सीटों से चुनाव जीत गई। लेकिन पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ा था।

ठीक उसी तरह 2019 ये वो साल है। जब कांग्रेस अध्यक्ष पद मिलने के बाद राहुल गांधी का पहला लोकसभा चुनाव होगा। खबरों की बात करें तो राहुल गांधी इस चुनाव में अमेठी के साथ साथ कही और से भी चुनाव लड़ सकते है। ये दो ऐसे बड़े राजनीतिक संयोग है जो कही न कही मौजूदा वक्त में बीजेपी को चुनाव लाभ दे सकता है। लेकिन इसका कितना लाभ मिलेगा ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा।