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इलेक्शन बुलेटिन

लोकसभा चुनाव 2019: आखिर क्यों केजरीवाल कांग्रेस से गठबंधन करने की गुहार लगा रहे हैं

कहते है राजनीति में कोई स्थाई दुश्मन या दोस्त नहीं होता। वक्त और जरूरतों के हिसाब से गठबंधन बनते हैं और टूटते हैं। लेकिन दिल्ली की केजरीवाल सरकार के लिए ये कहावत सहीं नहीं बैठ रही...

बीजेपी और कांंग्रेस से अगल तरह की राजनीति करने का दावा कर दिल्ली की सत्ता पर काबिज केजरीवाल अब कांग्रेस से गठबंधन की गुहार लगा रहे हैं। चांदनी चौक में एक रैली को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा कि मैं कांग्रेस से गठबंधन करने की बात कह-कह कर थक गया लेकिन कांग्रेस दिल्ली और यूपी में बीजेपी को जिताना चाहती है।

इतना ही नहीं केजरीवाल ने यहां तक कह दिया कि अगर अगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस बीजेपी को हरा देगी तो मैं दिल्ली लोकसभा की सात की सात सीटें छोड़ने को तैयार हूं... केजरीवाल की जुवां से ऐसे शब्द सुन कर मानों एक पल के लिए तो विश्वास ही नहीं हुआ .. कि ये वहीं केजरीवाल हैं जिन्होंने 2013 में भ्रष्टाचार के खिलाफ कांग्रेस की ईट से ईट बजा दी थी। 10 साल से काबिज शीला दीक्षित सरकार को जड़ से उखाड़ फेका था... खुद केजरीवाल ने शीला दीक्षित के खिलाफ चुनाव लड़ उन्हें हराया था।

ये राजनीति भी ग़ज़ब है कब किसको किसके द्वार ला लड़ा कर दे कोई नहीं जानता...

दरअसल, हाल ही में शरद पवार के दिल्ली निवास पर विपक्षी पार्टियां की बैठक हुई थी। उस बैठक में गठबंधन को लेकर भी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में बात हुई लेकिन उसका कोई नतीजा नहीं निकला। खबरों की माने को दिल्ली कांग्रेस यूनिट ने आम आदमी पार्टी से गठबंधन से साफ मना कर दिया है।

दिल्ली कांग्रेस की कमान शीला दीक्षित के हाथों में है। वो ही शीला दीक्षित जिस पर भ्रष्टाचार और न जाने क्या-क्या आरोप लगाकर केजरीवाल ने चुनाव जीता और अब दिल्ली में सरकार चला रहे हैं। दरअसल, दिल्ली में शीला दीक्षित आम आदमी पार्टी को चुनौती मानती ही नहीं है। उनका मानना है कि दिल्ली में कांग्रेस की टक्कर आम आदमी पार्टी से नहीं बीजेपी से है। अगर दिल्ली में कांग्रेस थोड़ी भी मजबूत होती है तो आम आदमी पार्टी को दिल्ली में भारी नुकसान होगा। 2013 और 2015 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने खुद को समाप्त कर लिया था.. कांग्रेस बैकफुट पर खड़ी थी। लेकिन अब कांग्रेस एक बार फिर फ्रंटफुट पर लड़ना चाहती है। दिल्ली में कांग्रेस को बढ़त मिलती है तो इसका सीधा सीधा नुकसान आम आदमी पार्टी को होगा।

दरअसल, ये चुनाव आम आदमी पार्टी के लिए अस्तित्व का चुनाव होगा। अगर आम आदमी पार्टी कांग्रेस से गठबंधन नहीं करती है तो 2019 लोकसभा चुनाव में शायद आप को एक भी सीट न मिले। लोकसभा चुनाव के बाद ही दिल्ली में विधानसभा चुनाव भी हैं ऐसे में राजनीति में बने रहने के लिए जरूरी है कि मोदी की आंधी में कांग्रेस की गोद में बैठ जाए।