उदय बुलेटिन
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Tejashwi and Sushil
Tejashwi and Sushil|google image
इलेक्शन बुलेटिन

लोकसभा चुनाव 2019: बिहार की जातिगत राजनीति का खेल, कौन पड़ेगा किस पर भारी

देश की राजनीति में 2019 का चुनाव काफी अहम है। यही कारण है कि राजनितिक दल अपने-अपने तरीके से सियासी समीकरण को साधने में लगे हुए हैं। ऐसा ही कुछ समीकरण हमे बिहार में भी देखने को मिल रहा है।

Anuj Kumar

Anuj Kumar

बिहार एक ऐसा राज्य है जहां जातिगत राजनीति कोई नई बात नहीं है। हमेशा से ही बिहार के नेता जातिगत राजनीति को बढ़ावा देते आए हैं। जातिगत समीकरणों में यूपी भी अछूता नहीं है लेकिन राम मंदिर जैसे मामलों पर धर्म यूपी की सियासत पर हावी हो जाता है। लेकिन बात आज यूपी की नहीं बिहार की होगी।

दरअसल, बिहार में पिछड़ी जाति को साधने के लिए एनडीए और महागठबंधन में होड़ लगी हुई है। बीते 15 फरवरी को बीजेपी ने दो दिवसीय सभा का आयोजन किया था। ये सभा राज्य में ओबीसी वोटरों को लुभाने के लिए थी । हालांकि पुलवामा में आतंकी हमला होने की वजह से इस सभा को रद्द कर करनी पड़ी। लेकिन अब सवाल उठता है आखिर बिहार में बीजेपी पिछड़ी जाति पर इतना मेहबान क्यों है। दरअसल बिहार की राजनीति में समान्य वर्ग से ज्यादा पिछड़े वर्ग की जनसंख्या है। ओबीसी कार्ड खेलते हुए बीजेपी इन्हें अपने पाले में करने की कोशिश में लगी हुई है।

तो वही दूसरी तरफ तेजस्वी यादव मोदी सरकार के 10 फीसदी आरक्षण का मुद्दा उठा, बीजेपी को ऊंची जाति की पार्टी बताने में लगे हुए हैं। तेजस्वी यादव ने बकायदा बिहार में इसे लेकर मुहिम छेड़ी हुई है। 'बेरोजगारी हटाओं, आरक्षण बढ़ाओं' के तरह तेजस्वी पूरे प्रदेश में सभा कर रहे हैं। दरअसल, राज्यसभा में जब 10 फीसदी आरक्षण बिल आया था उस वक्त आरजेडी ने इस बिल का विरोध किया था।

दरअसल, तेजस्वी स्वर्ण आरक्षण का विरोध कर पिछड़ी, अति पिछड़ी जाति के हिमायती बनना चाहते हैं। तेजस्वी 1990 में आई मंडल कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर एसटी, एससी, ओबीसी और ईबीसी जातियों को उनके जनसंख्या के आधार पर आरक्षण की मांग कर रहे हैं। ये तेजस्वी यादव का मंडल प्लान है जिसके जरिए बिहार में एससी/एसटी, पिछड़ी जाति और अति पिछड़ी जातियों के वोट बैंक को साधा जा सके।

क्यों महत्वपूर्ण है तेजस्वी के लिए ये चुनाव

राजनीति में लालू यादव के करियर पर अब लगभग फुल स्टॉप लग गया है। ऐसे में आरएलडी को चलाने और उसे आगे बढ़ाने का जिम्मा तेजस्वी यादव के कंधे पर है। ये पहला चुनाव होगा जब लालू प्रसाद यादव जेल की हवा खा रहें होंगे और तेजस्वी पर लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव होगा। ऐसे में तेजस्वी किसी भी मुद्दे को जोर-शोर से उठाकर पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हुए हैं।