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चुनाव से पहले NDA पर मंडरा रहे हैं संकट के बादल, क्या टूट जाएगा एनडीए ?

कहते है राजनीति में कोई भी पर्मानेट दोस्त और दुश्मन नहीं होता, वक्त के हिसाब से गठबंधन बनते है और टूटते है। ऐसा ही कुछ फिलहाल एनडीए में दिख रहा है। ताजा विवाद शिवसेना से जुड़ा हुआ है।

Anuj Kumar

Anuj Kumar

कहते है राजनीति में कोई भी पर्मानेट दोस्त और दुश्मन नहीं होता, वक्त के हिसाब से गठबंधन बनते है और टूटते है। ऐसा ही कुछ फिलहाल एनडीए में दिख रहा है। ताजा विवाद शिवसेना से जुड़ा हुआ है। गुरुवार को एक कार्यक्रम के दौरान शिवसेना ने मोदी सरकार पर नोटबंदी को लेकर जमकर निशाना साधा। शिवसेना ने कहा नोटबंदी मोदी सरकार की गलती थी लेकिन पार्टी इसे स्वीकार नहीं कर रही है। शिवसेना नेता आनंद राव अड़सुल यहीं नहीं रुके उन्होंने एनडीए से अलग होने की भी बात कह दी। आनंद अड़सुल ने कहा शिवनेता पहले भी अकेली चली थी और आगे भी अकेली चल सकती है। शिवसेना सरकार में नहीं बल्कि उस एनडीए का हिस्सा है जिसे कभी अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण अडवाणी, बाला साबेह ठाकरे ने शुरुआत की थी।

BJP

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दरअसल, महाराष्ट्र में चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर अभी भी शिवसेना और बीजेपी में पेच फंसा हुई है। खबरों की माने तो बीजेपी यहां पर भी बिहार वाले फॉर्मूले पर चलना चाहती है लेकिन शिवसेना तैयार नहीं है। शिवसेना चुनाव में बीजेपी से ज्यादा सीटों पर अड़ी हुई है। ऐसे में बीजेपी किस तरह महाराष्ट्र में चुनावी समीकरणों पर काम करती है ये तो देखने वाली बात होगी। लेकिन बीजेपी के लिए मुश्किले केवल महाराष्ट्र तक की सीमित नहीं है।

उत्तर प्रदेश में भी बीजेपी के सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर भी सरकार के विरूध लगातार अपनी आवाज बुलंद कर रहे है। राजभर ने तो राहुल गांधी को प्रधामंत्री पद का उचित दावेदार भी मान चुके हैं। इसी तरह पंजाब में भी अकाली दल ने गुरुद्वारा मामले पर बीजेपी को चेतावनी दी है। अकाली दल ने कहा कि अगर बीजेपी गुरद्वारा मामले पर इसी तरह दखलअंदाजी करती है तो अकाली और बीजेपी का गठबंधन टूट भी सकता है।

बीजेपी के लिए केवल यही मुश्किल नहीं है बल्कि नॉर्थ ईस्ट में भी नागरिकता कानून को लेकर मेघालय में बीजेपी की सहयोगी एनपीपी ने भी सरकार को धमकी दी। दरअसल, केंद्र की मोदी सरकार नागरिकता कानून बिल लोकसभा में पास करा चुकी है। अब सरकार इस कानून को राज्यसभा में पास कराने की बात कर रही है। एनपीपी ने मोदी सरकार को अल्टीमेटम दिया है कि अगर सरकार इस बिल को राज्य सभा में लेकर आती है तो हम उचित समय देखकर बीजेपी से नाता तोड़ देंगे। चुनाव से पहले बीजेपी को विपक्षी पर तर्क गढ़ने से पहले एनडीए के अंदर मचे इस कलेश को खत्म करना होगा। नहीं तो आने वाले चुनाव में बीजेपी को इसका खामियाज़ा भी भुगतान पड़ सकता है।