उदय बुलेटिन
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इलेक्शन बुलेटिन

क्या प्रियंका गांधी को पूर्वी UP की कमान देना बीजेपी और योगी आदित्यनाथ को सीधी चुनौती है?

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को बहन प्रियंका गांधी को पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश का चुनाव प्रभारी नियुक्त किया है 

Suraj Jawar

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सालों से चली आ रही अटकलों के बाद अततः प्रियंका गांधी सक्रिय राजनीति में आ गई हैं. कांग्रेस पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय महासचिव के साथ-साथ पूर्वी उत्तर प्रदेश का चुनाव प्रभारी भी नियुक्त किया है. इसको सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और बीजेपी के स्टार कैंपेनर योगी आदित्यनाथ के लिए चुनौती माना जा रहा है.

आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बनने से पहले लंबे समय तक गोरखपुर से सांसद रह चुके हैं. यह इलाका पूर्वी उत्तर प्रदेश में पड़ता है और इसे योगी का गढ़ माना जाता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बनारस के सांसद हैं जो यूपी के इसी हिस्से में है. ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के इस फैसले को योगी आदित्यनाथ के लिए सीधी चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बहन प्रियंका गांधी के अलावा युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की चुनावी कमान सौंपी है. इन दो युवा नेताओं को कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश की चुनावी कमान देकर अपना इरादा साफ कर दिया है कि वह एसपी-बीएसपी गठबंधन के बाद भी वह मैदान छोड़ने के मूड में नहीं है

एसपी-बीएसपी गठबंधन होने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि उनकी झोली में उत्तर प्रदेश के लिए एक सरप्राइज है लेकिन किसी ने यह नहीं सोचा था कि वे प्रियंका गांधी को सक्रिय राजनीति में लाने का ऐलान करने वाले हैं. हालांकि प्रियंका गांधी पहले से ही कांग्रेस के अंदर अनौपचारिक तौर पर फैसले लेती थीं. अब उन्हें आधिकारिक पद मिल गया है तो वे औपचारिक तौर पर फैसले लेने में सक्षम होंगी.

लोकसभा में उत्तर प्रदेश से ही सबसे ज्यादा 80 सांसद आते हैं लेकिन पिछले कई सालों से कांग्रेस सिर्फ अमेठी और रायबरेली तक ही सिमट कर रह गई थी. राज्य में प्रियंका गांधी की एंट्री से पार्टी को राजनीतिक लाभ मिलेगा या नहीं यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा. लेकिन पार्टी के नेताओं को उम्मीद है कि इससे पार्टी के कार्यकर्ताओं में एक नया जोश जरूर आएगा.