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कांग्रेस की जीत के बाद मध्यप्रदेश में कौन बनेगा मुख्यमंत्री पूछे जाने पर, क्या बोल गए कमलनाथ

कांग्रेस में मुख्यमंत्री के उम्मीदवार को लेकर पूछे गए सवाल पर कमलनाथ ने कहा, “मतगणना के बाद यह साफ हो जाएगा कि मुख्यमंत्री कौन होगा।”

AKANKSHA MISHRA

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भोपाल: मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव (Madhya pradesh Assembly Election 2018 ) समाप्त हो गया है, चुनाव की मतगणना 11 दिसंबर यानि मंगलवार को होने वाली है। बीजेपी के शिवराज सिंह चौहान पिछले 13 साल से मध्यप्रदेश के मुख्य मंत्री रहे हैं। इसबार सत्ता परिवर्तन की लहार है। एग्जिट पोल के अनुसार भी कांग्रेस को बढ़त मिलती नज़र आ रही है।

बरहाल किस पार्टी की जीत होती है ये जानने के लिए हमें कल तक का इन्तिज़ार करना होगा। नतीजा आने से पहले कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ ने एक बार फिर दावा किया है कि राज्य में कांग्रेस को बहुमत मिलना तय है और मुख्यमंत्री कौन होगा, यह मतगणना के बाद साफ हो जाएगा। कमलनाथ ने पत्रकारों से कहा, "मैं पिछले तीन माह से राज्य में 140 सीट पर कांग्रेस के जीतने की बात कहता आया हूं और अब भी उस पर कायम हूं। मंगलवार को मतगणना से यह बात सामने आ जाएगी।"

कांग्रेस में मुख्यमंत्री के उम्मीदवार को लेकर पूछे गए सवाल पर कमलनाथ ने कहा, "मतगणना के बाद यह साफ हो जाएगा कि मुख्यमंत्री कौन होगा।"

कांग्रेस में मुख्यमंत्री के उम्मीदवार को लेकर पूछे गए सवाल पर कमलनाथ ने पहले तो सवाल मुस्कुराते हुए टाल दिया , लेकिन दोबारा पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "मतगणना के बाद यह साफ हो जाएगा कि मुख्यमंत्री कौन होगा।" लेकिन खुद के सीएम बनने की संभावना से भी उन्होंने इनकार नहीं किया था और कहा था कि वक्त आने पर सबकुछ साफ हो जाएगा।

वहीं अगर बीजेपी चुनाव जीत लेती है तो मुख्यमंत्री पद के दावेदार तो शिवराज सिंह चौहान ही होंगे। लेकिन कांग्रेस ने अपना मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित नहीं किया था, जिसके बाद से ही यह सवाल उठना लाजमी है।

भाजपा के पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा द्वारा एग्जिट पोल के आधार पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लेकर दिए गए बयान पर कमलनाथ से जब पूछा गया कि क्या जीत का श्रेय लेने के साथ शिवराज को हार का भी दोष लेना चाहिए, तो उन्होंने कहा, "यह भाजपा का मामला है, वे ही अपनी बात कहें।"

रघुनंदन शर्मा ने एग्जिट पोल के बाद कहा था कि एग्जिट पोल से इतना तो साफ हो गया है कि नतीजे हमारी इच्छा के अनुसार नहीं आ रहे है। मुख्यमंत्री चौहान अगर जीत का श्रेय लेते हैं तो अगर हार होती है तो उसका दोष भी उन्हें ही लेना चाहिए।

बता दें कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस पिछले 15 सालों से सत्ता से बाहर है। इस बार यहाँ कांग्रेस की करो या मरो वाली स्तिथि है। एग्जिट पोल के अनुसार इस बार कांग्रेस की सत्ता में वापसी की उम्मीद जताई जा रही है।