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पुलवामा हमला: भारत पाकिस्तान के बीच वर्ल्ड कप मैच पर अपनी राय बनाने से पहले इसे जरूर पढ़े

पुलवामा हमले के बाद पूरे देश में आक्रोश का माहौल है। भारत हर मोर्चे पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने की कवायद में जुट गया है। इसका असर भी देखने को मिल रहा है।

भारत ने पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा छीन लिया है। पाकिस्तान से इम्पोर्ट होने वाले माल पर कस्टम ड्यूटी 200 फीसदी तक बढ़ा दी गई। भारत कई आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्र में पाकिस्तान को घेर रहा है। लेकिन अब बात इस साल होने वाले वर्ल्ड कप में भारत पाकिस्तान के बीच मैच पर आ टिकी है। कुछ लोग कह रहे हैं कि मैच होना चाहिए। तो कुछ लोगों का कहना हैं कि नहीं होना चाहिए। आपकी भी राय इस बारे में कुछ न कुछ होगी। अपनी राय बनाने से पहले कुछ सच्चाई जांच लें परख लें।

एक रिपोर्ट के मुताबिक इस साल होने वाले भारत-पाक के बीच वर्ल्ड कप मैच में 25 हजार सीटों के लिए डेढ़ लाख एप्लीकेशन आईसीसी के पास आए। ये सच है कि भारत पाकिस्तान मैच को लेकर जितना उत्साह लोगों के बीच रहता है उनता वर्ल्ड कप फाइनल मैच में भी नहीं होता है

रिपोर्ट के मुताबिक साल 2015 में खेले गए वर्ल्ड कप में आईसीसी को 305 करोड़ का फायदा हुआ था। केवल भारत पाकिस्तान के बीच हुए मैच को 28 करोड़ से ज्यादा लोगों ने देखा था। इस मैच से ही केवल आईसीसी को 100 से 110 करोड़ रुपए एड रिवेन्यू से मिले थे। जानकारों का मानना है कि 2019 वर्ल्ड कप में आईसीसी को इस एक मैच का और अधिक फायदा होगा।

आकड़ों की बात करें तो आईसीसी के कुल रेवेन्यू का 23 फीसदी हिस्सा बीसीसीआई हथिया लेता है। दरअसल, मैच न होने की सूरत में आईसीसी और बीसीसीआई दोनों को ही भारी नुकसान होगा। इसके साथ ही इस तरह के मैच को लेकर एड कंपनियों का भी प्रेशर बोर्ड पर होता है। ऐसे में क्या पाकिस्तान से मैच न करा कर बीसीसीआई अपना नुकसान करवाएगा। ये सोचने वाली बात है। ये ही कारण है कि बीसीसीआई फिलहाल वेट एंड वाच की स्थिति में है। आईपीएल के चेयरमैन राजीव शुक्ला ने कहा है कि विश्व कप अभी दूर है इस समय किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं है। इस बात से ये साफ हो जाता है कि फिलहाल बीसीसीआई इस बारे में कोई फैसला नहीं लेना चाहता।

ओलंपिक में यूएस ने नहीं खेला था सोवियंत संघ के खिलाफ

अब सवाल ये उठता है कि क्या पहले ऐसा कभी हुआ था कि कोई देश दूसरे देश के खिलाफ न खेला हो। तो जवाब है हां। साल 1980 में जब सोवियत संघ और अमेरिका के बीच तनावपूर्ण स्थिति थी। उस वक्त मास्को ओलंपिक में अमेरिका की एक भी टीम नहीं गई थी। ठीक उसी तरह 1984 में लॉस एंजिल्स में ओलंपिक हुआ था। उस वक्त सोवियत संघ की टीमें अमेरिका नहीं गई थी।

अब देखने वाली बात ये होगी कि बीसीसीआई क्या फैसला लेता है !