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बाँदा जिले की की सड़क का हाल।
बाँदा जिले की की सड़क का हाल।|Uday Buuletin 
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जुर्माने की रकम कई गुना, लेकिन आमदनी का क्या ?

साहब जुर्माना बढ़ा दिया हैं, तो सड़क भी बनवा देते।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

भारत सरकार ने परिवहन को लेकर नए मापदंड निर्धारित किये है जिसमें नियम विरुद्ध वाहन चलाने में दोषी पाए जाने पर पूर्व में लिए जाने वाले जुर्माने से कई गुना ज्यादा रकम वसूली जाएगी, और ये बदला हुआ आदेश देश के तीन राज्यो पश्चिम बंगाल, राजस्थान, और मध्यप्रदेश को छोड़कर सारे देश मे लागू हो चुका है।

कहते है कि कर और दंड वैसा होना चाहिए कि जिससे करदाता और अपराधी में भय व्याप्त हो , ऐसा नही की उस कर और दंड की सीमा इतनी विस्तृत हो कि व्यक्ति दंड और कर से ज्यादा मुफीद सजा को समझे, अगर ऐसा होता है तो समस्या बेहद व्यापक होगी, जिसके परिणाम भयानक हो सकते है,
यह भी सच है कि पिछले कुछ वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं में इजाफा हुआ है, इसके कुछ कारण सुरक्षा उपकरण, और नियमों की अनदेखी है, लेकिन फिर भी सरकारों को अपने दामन पर नजर डालनी होगी, लेकिन सरकार सारा दारोमदार आम जनता पर डालकर अपना फर्ज मुकरने की स्थिति में है

सड़क दुर्घटनाओं के संभावित कारक:

  1. सुरक्षा मानकों का पालन न करना: हेलमेट और सीट बेल्ट पहन कर ड्राइविंग न करना दुर्घटना को दावत देने जैसा है और दुर्घटना होने पर जान जाने के चांस ज्यादा है।
  2. शराब और अन्य मादक पदार्थों के उपयोग: वाहन चलाते समय सभी प्रकार के मादक पदार्थ चालक की सोचने समझने और निर्णय लेने की क्षमता को मंद कर देते है, अधिकतर दुर्घटना मामलों में ये कारक बेहद प्रचलित है, खासकर युवा इस दुर्घटना का शिकार ज्यादा होते है।
  3. संकेतो की जानकारी न होना: भारत मे ड्राइविंग लाइसेंस रेवड़ियों की तरह बांटे जाते है, इसका मुख्य कारण है आरटीओ विभाग में चिर परिचित धांधली, दलालों के द्वारा अपात्र व्यक्ति को भी बिना ड्राइविंग टेस्ट लिए सिर्फ कम्प्यूटर पर टेस्ट पास करा के लाइसेंस दिया जाता है, और इसके एवज में नीचे से ऊपर तक कमीशन खोरी व्याप्त है, कई मायनों में पात्र और योग्य ड्राइवर सिर्फ कानूनी दांवपेंच से बचने के लिए लाइसेंस ही नही लेते , जिसका खामियाजा उन्हें दंड के रूप में भुगतना पड़ता है।
  4. 4 सड़को की दशा: भले ही सरकार तमाम नए नियम कानून जनता पर लाद दे लेकिन अपने गिरेबान में झांकने का कष्ट नही करती, 100 वाहन दुर्घटनाओं में करीब करीब आधी घटनाएं सड़क के सही नहीं होने, अमान्य स्पीड ब्रेकर , गड्ढों, सड़क पर अतिक्रमण, आवारा पशुओं की वजह से होती है, इस मामले को इस तरह से समझना होगा कि अगर कोई कार चालक हाई वे पर अपनी कार को औसत रफ्तार 60 से चला रहा है, उस वक्त अगर कोई जानवर सांमने आता है तो जानवर को बचाने और खुद को बचाने दोनो दशा में दुर्घटना को आमंत्रित करेंगे।

आर्थिक दंड किसी व्यक्ति को रास्ते पर लाने का एक मात्र विकल्प नही हो सकता, समझाना पड़ता है, अर्थदंड भी आवश्यक है लेकिन इतना नही की एक अर्थदंड में ही चालक का एक माह का वेतनमान चला जाये, फिर वह कहीं न कहीं नैतिक रूप से विघटित होगा, इस नियमावली का सबसे ज्यादा असर आम जनता जैसे कि प्राइवेट जॉब करने वाले कर्मियों पर पड़ेगा, जिनकी रोजी रोटी पर वैसे भी संकट चल रहा है

रिश्वतखोरी के बढ़ेंगे दायरे: अगर किसी अर्थदंड का मूल्य 20000, है तो खुद भुक्तभोगी इसे 5000 में निबटाना बेहतर समझेगा, और यही कारण परिवहन में भयानक रिश्वतखोरी को फैला देगा, और कई विभाग इस नियमावली को आठवें और नवमे वेतन आयोग की तरह देखेंगे