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Arun Jaitley
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अरुण जेटली: राजनेता और वकील से भी आगे और कुछ, जो उन्हें महान बना देता है

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

Summary

किसी महान व्यक्ति ने कहा था कि आप महान तभी बनते है जब आप लोगो को महान बनाने का प्रयत्न करते है, अरुण जेटली के व्यक्तित्व कुछ ऐसा ही था, उनके घर मे काम कर्म वाले कुक से लेकर ड्राइवर तक अरुण जेटली के इस भंगुर संसार से जाने बाद बिलख उठते है, उनके अनुसार आज जो उनका उज्जवल भविष्य है वो सब जेटली जी की कृपा से है”

भाजपा के दिग्गज नेता , जाने माने वकील , पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली जिनके बारे में आज दुनिया को वो बाते भी बताई जा रही है जिसके बारे में किसी को शायद जानकारी भी नही थी,

जेटली ने लगभग 66 वर्ष की आयु में इस कष्टमय जीवन को अलविदा कहा, एम्स के आईसीयू में उन्होंने अपनी आखिरी सांस ली, इससे पहले वह कैंसर जैसी भयावह समस्या से पीड़ित थे, हालाकिं इसका उपचार पूरा हो चुका था फिर भी उपचार के बाद भी तमाम समस्याएं आती रही, जिसके कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया, और 66 साल की अल्पायु में अरुण इस विराट दुनिया के आकाश में अस्त हो गया।

कर्मचारी परिवार की तरह थे:

जेटली केवल संसद में अपनी संतुलित भाषा के लिए ही नही जाने जाते थे, बल्कि उनके घर मे भी लगभग यही माहौल था, उनके घर मे करीब 20 सहयोगियों का स्टाफ मौजूद था, जिसमे कुक से लेकर ड्राइवर तक शामिल थे , और उनके साथ बिलकुल परिवार के सदस्यों के जैसा व्यवहार होता था, घर के किसी सदस्य की हिम्मत नही थी कि किसी कर्मचारी से बदतमीजी से बात कर बैठे।

यही कारण था कि कर्मचारी भी जेटली और जेटली के परिवार की सेवा बिल्कुल परिवार के सदस्यों की तरह करते थे, घर के सदस्यों ने बताया कि जब  भी जेटली जी को या घर के किसी सदस्य पर समस्या आयी कभी किसी कर्मचारी ने यह नही कहा कि मुझे आज जल्दी जाना है , या फिर टाल मटोल किया हो,

जेटली जी जब तक अस्पताल में रहे , उनके कर्मचारियों द्वारा मंदिरो-मंदिरो जाना, हवन इत्यादि कराना अपने मालिक की ओर श्रद्धा और जल्दी ठीक होने की भावना को दर्शाता है

अपने बच्चों और कर्मचारियों के बच्चों के साथ एक जैसा व्यवहार :

जेटली जी ने अपने घर मे एक बिना घोषित नीति तैयार कर रखी थी, जिसमे अपने बच्चों के जेब खर्च और कर्मचारियों के बच्चों का जेब खर्च बिल्कुल एक जैसा ही होता था, यहां तक कि कर्मचारियों के बच्चे  भी उसी स्कूल में पढ़े जहाँ जेटली के बच्चों ने शिक्षा पायी, यह सब यहाँ तक ही सीमित नही रहा, बल्कि जिन कर्मचारियों के बच्चे योग्यता रखते और विदेश में पढ़ने के इच्छुक रहते तो उन्हें जेटली जी अपने खर्च पर विदेश भी भेजते, इसका यही कारण है कि हर जगह जेटली जी के साये की तरह रहने वाले गोपाल भंडारी जी के दोनों बेटे जिंनमे एक डॉक्टर और दूसरा दूसरा इंजीनियर है , और गोपाल भंडारी जेटली जी के आखिरी क्षणों तक आईसीयू के बाहर चहलकदमी करते नजर आए, दोनो बेटो के इतने अच्छे पद पर  कार्यरत होने के बाबजूद गोपाल जेटली जी के पास रहना पसंद करते थे ,यह केवल स्नेह और समर्पण ही था।

कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा और नौकरी जैसी विषम परिस्थितियों में जेटली जी का भरपूर समर्थन रहता था, वर्तमान में कर्मचारी जोगेंद्र की दो बेटियों में से एक बेटी लंदन में पढ़ रही है,

"बुजुर्गों के अनुसार अगर किसी के व्यक्तित्व के स्तर का पता लगाना है तो उसका अपने से छोटे कर्मचारियों के प्रति बर्ताव देखे, और जेटली जी इस परीक्षा में अव्वल नम्बरों से पास हुए है, यही कारण है कि आज उनके परिवार से ज्यादा कर्मचारियों में दुख व्याप्त है, लोग उन्हें मालिक कम और अभिभावक ज्यादा मानते थे"