उदय बुलेटिन
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Emilie Schenkl
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ब्लॉग

भारत की अभागन बहू, जिसके पति के बलिदान और देश प्रेम को देश ने नकार दिया

सुभाष चंद्र बोस की पत्नी एमिली शेंकल की कहानी !

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

Summary

किस बहू का अरमान नही होता कि उसका ससुराल में स्वागत हो, घर मे अधिकार हो, स्नेह मिले, जबकि पति केवल घर का ही नही बल्कि देश के भविष्य को सुधारने में लगा हुआ था, जंग लड़ी, देश विदेश संपर्क साधे, देश मे पति का स्वागत सम्मान हुआ और जब पति नही रहे तो देश ने उन्हें ऐसे नकार दिया जैसे उसका और उसके पति का इस देश मे कोई योगदान ही न रहा हो, अब इसे चाहे तो राजनैतिक महत्वाकांक्षा समझ ले, या सत्ता खोने का डर, शायद ऐसा ही कुछ रहा होगा क्योंकि देश की वो शायद पहली संज्ञानित विदेशी बहू मौत के आखिरी क्षण तक उपेक्षित ही रही, यहाँ तक कि मौत के बाद भी उसे ससुराल की मिट्टी नसीब नही हुई।

आज चर्चा होगी हमारे नेता जी (नेताजी के मतलब आज के नेताओं से कतई नही है, भला आज का कौन सा नेता जनता और देश के लिए बंदूक उठाने की हिम्मत रखता है) नेताजी मतलब सुभाष चंद्र बोस और उनके परिवार की !

नेता जी का जीवन जितना संसय भरा रहा भारतीय इतिहास में उन्हें एक नेता से क्रांतिकारी की कैटेगरी में भी रखा और नेता की भी, असल मायने में वही थे नेता जी।

कांग्रेस अधिवेशन में जिन्होंने सर्वसम्मति से कांग्रेस का पद भी पाया किंतु राज सत्ता लोलुपता के मारे युवराजों की चाहत देखकर उसे भी लात मार दी, और देश की आजादी के लिए एक सेना का गठन किया, जंग भी लड़ी, और देश का एक टुकड़ा अंग्रेजों के कब्जे से आजाद भी कराया,लेकिन सुभाष चंद्र बोस की जनता के बीच की पकड़ तत्कालीन भारतीय नेताओं के लिए एक भारी समस्या थी ,जिसकी वजह से उनकी मौत न सिर्फ एक रहस्य बनी बल्कि एक पहेली भी बन गयी, कभी अयोध्या के गुमनामी बाबा के नाम पर किस्से चले, हालकि एक कमेटी ने यह संकेत भी किया कि यही सुभाष थे, लेकिन कभी भी इस मुद्दे को राष्ट्रीय लेवल पर न तो जांच का विषय बनाया गया, और न ही इस पर कभी शोध हुआ, हा बातो पर अफवाहों का टैग लगाकर मिट्टी डालने का काम जरूर किया गया, खैर हम मुद्दे से भटक रहे है, हमे नेता जी की नही उनकी धर्मपत्नी की बात करनी थी

नाम था श्रीमती एमली शेंकल, प्रेम विवाह हुआ था भारत माता के सबसे लाडले बेटे सुभाष से। 1934 का वक्त ,सुभाष उस समय ऑस्ट्रिया के दौरे पर थे, उन्हें एक पुस्तक लिखाने के लिए ऐसे टाइपिस्ट की आवश्यकता हुई जो अंग्रेजी की जानकारी रखती हो, मित्रो के समूह ने एमली का नाम प्रस्तावित किया, और यही से एमली और सुभाष के बीच प्रेम पनप गया खैर वक्त के साथ सुभाष ने हिन्दू पद्यति से विवाह भी किया किया और उन दोनों से एक बच्ची भी पैदा हुई, नाम रखा गया अनीता।
Subhash Chandra Bose  and His Wife Emili
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इन सब के साथ दुनिया एक और तवाही से मिलने जा रही थी, दूसरा विश्वयुद्ध, और जो कि हुआ भी , सब तहस नहस भी हो गया लेकिन सौभाग्य से एमली और अनीता बच गयी, और इसी बीच सुभाष किसी तरह की साजिस कहे या कुछ और इसके शिकार हो गए, उनका विमान तथाकथित रूप से दुर्घटनाग्रस्त हो गया, इसके बाद एमली का बुरा दौर शुरू हुआ, सबसे पहला काम था बच्ची की परवरिश, जो कि एक अकेली माँ के लिए बेहद कष्टदायक था, किसी तरह एक तार घर (एक प्रकार का डाकघर) में बेहद मामूली नौकरी करके जीवन बिताया, देश को तो छोड़िए यहाँ तक कि बोस परिवार ने भी एमली की कोई खोज खबर नही ली, हां वो बात अलग है कि जब सुभाष के भाई शरद जब एक बार ऑस्ट्रिया गए तो एमली ने अपने संबंधी जानकर उनका बेहद गर्मजोशी भरा स्वागत किया, जो कि बोस के परिवार आज भी याद करता है।

समय बीतता गया, देश आजाद हुआ, सरकारें आयी, यहाँ पिता की मौत के बाद मर्सी के दम पर कुछ लोग या महिलाएं देश की प्रधानमंत्री बनी, और उसके बाद से अब तक यही होता आया है कि मेरे पिता ने कुर्बानी दी, मेरी माँ ने देश के लिए जान दी, लेकिन किसी ने एमली के बारे में कोई खबर नही ली !
वक्त था 1996 का मार्च, एमली ने अपने पति के वतन और उसकी मिट्टी की चाहत लिए हुए आखिरी सांस ली, बेटी आज भी जीवित है, कभी-कभार अपने परिवारीजनों से मिलने भारत भी आती है, लेकिन सवाल अभी भी वही है!
Q

आखिर एमली को वो सब क्यों नही मिला जो उसे मिलना चाहिए था?

क्या सिर्फ इसलिए की वो विदेशी थी ?

गलत तर्क !

भारत मे लंबे वक्त तक भले ही प्रधानमंत्री कोई भारतीय रहा हो लेकिन असल सरकार तो रिमोट से चलाई गई, अब कोई कहे या न कहे !

सरकारों ने सुभाष और उनके परिवार को पहचान सिर्फ इसलिए नहीं दी कि कह कहीं ऐसा न हो कि हमारी पहचान ही धूमिल हो जाये, या गद्दी हमारे पीछे से खिसक जाए।

यही कारण था कि जब देश आजाद हुआ तो एमली ने भारत आने की इच्छा जताई तब तत्कालीन प्रधानमंत्री का सिंघासन इंद्र के सिंघासन की माफिक हिलने लगा और डर लगा कि कहीं सत्ता न खो जाए, इसीलिए वीजा तक उपलब्ध नही कराया गया...........

Q

पता नहीं सुभाष विमान दुर्घटना के बाद जिंदा रहे या महज अफवाहें भर थी, लेकिन क्या किसी ने सुभाष की जीवित पत्नी एमली की तरफ नजर दौड़ाई ?

क्या उन्हें भारत की नागरिकता देने का अप्रोच किया गया?

तमाम सांसद पांच साल के लिए चुनाव जीतकर पेंशन और भत्ते के लुत्फ उठाते है ....क्या एमली को कोई मदद दी गयी?

नही न !

आखिर यही हश्र होता है असल नेताओ और शहीदों का...

चाहे वो सुभाष हो या शास्त्री जी