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2019 परीक्षा परिणाम: हम बड़े भुल्लकड़ है ,बाबा रणछोड़ दास का ज्ञान चार दिन में भूलकर गजनी हो गए हैं 

आज शिक्षा सामाजिक अवश्यकता न होकर व्यावसायिक आवश्यकता बन गयी है

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

दो चार दिन पहले से 99.9% का हो हल्ला मचा हुआ है, यूपी बोर्ड सीबीएसई ओर आईसीएससी इत्यादि के बोर्ड ने परीक्षाओं के परिणाम जारी किए है, मेधावी छात्रों को सम्मानित किया जा रहा है, वो अपनी जीवनशैली का खुलासा कर रहे है, नंबर लाने का फार्मूला बता रहे है

लेकिन क्या हमने सोचा है कि जिनके अंक उतने प्रभावी नही है उनके जीवन मे कितनी उथल पुथल मची हुई है, घर मुहल्ला स्कूल, रिस्तेदार(भले ही वो हाई स्कूल में ग्रेस मार्क से पास हुए हों) वो आज किसी महान शिक्षक की तरह ज्ञानी नजर आ रहे है, लेकिन इस तरह की शिक्षा प्रणाली हमारे समाज को पंगु करने का प्रयास नही कर रही है, कहीं न कहीं ये शिक्षा प्रणाली  एक विकट समस्या बनती जा रही है।

क्या हम हर बच्चे को एक जैसा मानने की भूल नही कर रहे, जबकि आपको ज्ञात होना चाहिए कि हमारे शरीर के जुड़वा अंग भी एक समान नही होते ,हमारे दोनो हांथो और टांगो में भी थोड़ी सा अंतर पाया जाता है, किडनी, आंखे, भी एक दूसरे से भले ही थोड़ी लेकिन अलग होगी, लेकिन अगर गुप्ता जी का सुपुत्र तीन विषय मे डिकटेंशन लाया है तो आपका बेटा क्यो नही?

आप अपनी अपेक्षाएं जबरजस्ती बच्चे पर लाद दे रहे है।

जरूरी नही कि समाज के सारे बच्चे डॉक्टर बने या फिर इंजीनियर या वैज्ञानिक!

समाज मे हर वर्ग की जरूरत है , एक सिपाही से लेकर वैज्ञानिक तक, सब की शिक्षा के मापदंड अलग है कार्यानुसार,

कैसा होगा वह समाज जहां सिर्फ वैज्ञानिक पाए जाए या फिर सिर्फ डॉक्टर या फिर इंजीनियर की भयानक भीड़,

जी नही समाज किसी एक विषय जीवनशैली में पारंगत लोगो का समूह नही है, समाज मे अत्यधिक वर्गीकरण पाया जाता है जो हर मायने में सामाज के लिए हितकर ही है,

जरूरी नही की जो बच्चा नम्बर्स लाये वही समाज मे रहने योग्य है और जो कम लाये वह समाज से बहिष्कृत किया जाना चाहिए , आपके सामने कई उदाहरण मिल जायेंगे जो अधिकतर कम अंको के साथ पास हुए हो उन्होंने अपने दम से बड़े बड़े मुकाम हासिल किए है

शिक्षा आपको सिर्फ पैसे कमाने या नाम कमाने का मौका नही देती ,बल्कि यह आपको पशुवत जीवन से उन्नत मानव बनाती है

शिक्षा को अंको से तौलना-मापना बंद करिये,शिक्षा सिर्फ आंकड़ो का पर्याय नही बनाई जा सकती, शिक्षा आपके मन,विचारो,जीवनशैली में श्रेष्ठता लाती है,

अगर आपका बच्चा आपकी सोसाइटी के अन्य बच्चों के मुकाबले कम नंबर लाया है तो यह बच्चे की समस्या नही है ,आपको अपना मूल्यांकन करना होगा, आपको यह देखना होगा कि कहीं हमने जरूरत से ज्यादा अपेक्षाएं उस बच्चे पर तो नही लादी हैं , क्या विषय चयन में हमने बच्चे या बच्ची की रुचि और लगन ना देखकर अपनी खुन्नस तो नही निकाली है,

मुझे यकीन नही होता कि आज की नंबर लाने की प्रवृत्ति कितनी भयावह होती जा रही है , जहाँ 90+ लाने वाले बच्चे हर जगह सम्मान पा रहे है वही कम अंक वाले तिरिस्कार , कई बच्चे तो  घर से निकलना बंद किये है ये उनके लिए धीमे जहर का काम करेगा।

उठिए अपना नजरिया बदलिए, ओर गौर करिये की आपकी गलती आखिर कहाँ थी,बच्चे को संभालिये उसे बताएं कि उसने जो किया वो बहुत था ,अगर मार्क्स ज्यादा कम है तो उसे आगे कड़ी मेहनत के लिए उत्साहित करिये ,उसे भरोसा दिलाएं की वह उस से कही ज्यादा प्राप्त कर सकता है, उदाहरण बनाये ओर बताएं ,आखिर बच्चा आपका है और बकौल आर माधवन( 3 इडियट) बच्चे के लिए नींद आपने खोई है शर्मा जी ने नही!!!!

सभी विद्यार्थियों के शुभाशुभ परिणामो पर शुभकामनाएं