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Milind Khandekar, Punya Prasun Bajpai, Abhisar Sharma
Milind Khandekar, Punya Prasun Bajpai, Abhisar Sharma|google image
ब्लॉग

“जल में रह कर मगरमच्छ से बैर नहीं किया जाता” यह बात पुण्य प्रसून बाजपेयी और अभिसार शर्मा को भी समझ लेनी चाहिए !

आप एक बेहतर जर्नलिस्ट हो सकते है लेकिन आपको वही लिखना और बोलना है जो टीवी चैनल का मालिक चाहता है !

Abhishek

Abhishek

मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, लेकिन आज के समय किसी खबर को सच नही कहा जा सकता है। न्यूज़ चैनल पर खबर भी अब लाभ और हानि के पैमाने से तौली जाती है। क्या दिखाना है और कैसे दिखाना है यह सब पहले से ही तय कर लिया जाता है !

बैसे तो सिक्के के दो पहलू होते हैं लेकिन राजनीति वो सिक्का है जिसका तीसरा पहलू भी होता है | अपने देश में जिस पार्टी की सरकार हो, आप उसके ख़िलाफ़ बोलेंगे तो आप के “अच्छे दिन जाएँगे” | बात मीडिया की निष्पक्षता की हो या मीडिया में सरकार की दख़लन्दाज़ी की, ये दोनों हमेशा से सवालों के कटघरे में खड़े रहे हैं।

आम नागरिक के हिसाब से न्यूज़ चैनल की हर ख़बर में कितना सच, कितना झूठ है? ये सब आपके राजनैतिक परिस्थितियों के आकलन की समझ पर निर्भर करता है।

मीडिया, जिसे लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ माना जाता है, जिसका कार्य सूचना प्रदान करना और जन हित बरक़रार रखना था, अब यह मीडिया खबरें बताता नहीं बल्कि बेचता है | एक कहाबत है "पहले सेवा बाद में मेवा" लेकिन मीडिया के लिए ये कहाबत चरितार्थ नहीं है। आज का मीडिया “पहले मेवा है बाद में सेवा” पर कार्य करता है |

अब बात आती है सरकार की, अब सरकार भला ये क्यूँ चाहेगी कि मीडिया की रिपोर्टिंग के चलते जनता में सरकार के प्रति विश्वास कम हो? अगला चुनाव भी तो जीतना है। इसलिए सरकार द्वारा मीडिया को नियंत्रित करने की कोशिशें की जाती रहीं है जो किसी से छुपी नहीं है |

कुछ दिन पहले देश के दो बड़े ख़बरदारों अर्थात पत्रकारों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। ये पत्रकार हैं पुण्य प्रसून बाजपेयी और अभिसार शर्मा।

दोनों ही भारत के प्रतिष्ठित पत्रकारिता अवार्ड “रामनाथ गोयनका अवार्ड” से नवाजे जा चुके हैं। यह अवार्ड उस पत्रकार को दिया जाता है जिसने किसी भी राजनीतिक पार्टी या धर्म का पक्ष लिए बिना सही पत्रकारिता की हो। सीधे-सीधे कहें तो रामनाथ गोयनका अवार्ड देश के निष्पक्ष पत्रकार को दिया जाता है |

आइए पहले बात करते हैं पुण्य प्रसून बाजपेयी की।

पुण्य प्रसून बाजपेयी ने अपने करियर में कई समाचार चैनेलों में काम किया, जैसे आज तक, जी न्यूज़, NDTV, सहारा समय, ABP न्यूज़। पुण्य प्रसून के दिन ख़राब शुरू होते हैं ABP न्यूज़ से। ABP न्यूज़ में वह "मास्टरस्ट्रोक" कार्यक्रम करते थे | इस कार्यक्रम में पुण्य प्रसून बाजपाई केंद्र सरकार की नीतियों और दावों की आलोचना स्वयं द्वारा जुटाए गए तथ्यों के आधार पर करते थे |

पुण्य प्रसून बाजपाई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके द्वारा चलाए गए विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के लाभार्थियों के बीच “मन की बात” के एक वीडियो इंटरैक्शन के बारे में, अपनी कहानी में सरकार की आलोचना की थी। इसके बाद पतंजलि सहित कुछ विज्ञापनदाताओं ने अपने विज्ञापन चैनल से हटा लिए। इस दबाव में, पुण्य प्रसून बाजपेयी को अगस्त 2018 चैनल से इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा।

कहा तो ये भी जाता है कि पुण्य प्रसून बाजपाई ने भाजपायी होने से मना किया तो तो उनको इस्तीफ़ा देना पड़ा | पुण्य प्रसून के साथ ABP न्यूज़ चैनल के एक मुख्य अधिकारी मिलिंद खांडेकर को भी बाहर का रास्ता दिखाया गया।

ABP न्यूज़ से निकले जाने के बाद पुण्य प्रसून वाजपेयी ने हाल ही में सूर्या समाचार ज्वाइन किया था। अब खबर है कि वहाँ से भी उनकी सेवाएँ समाप्त करने का नोटिस देकर 31 मार्च 2019 तक नौकरी छोड़ने को कहा गया है।

अब बात करते हैं पत्रकार अभिसार शर्मा की, अभिसार शर्मा NDTV, ZEE NEWS, BBC, और ABP न्यूज़ के लिए काम कर चुके हैं। इनका भी मामला ABP न्यूज़ से ही जुड़ा है।

अभिसार शर्मा प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई वाली सरकार के सबसे भयंकर आलोचकों में से एक रहे हैं। अभिसार अपनी रिपोर्ट और वीडियो ब्लॉग के द्वारा मोदी सरकार की कमियों को उजागर करते आ रहे हैं।

कहा जा रहा है कि अभिसार शर्मा को ABP न्यूज़ के मैनेजमेंट ने प्रधानमंत्री की आलोचना न करने की चेतावनी भी दी थी लेकिन अभिसार शर्मा ने मैनेजमेंट की बातों को दरकिनार कर दिया और वह प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार की आलोचना करते रहे |

बीते दिनों लखनऊ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदेश की कानून व्यवस्था में हुए सुधार का दावा किया था । अभिसार ने इस दावे के साथ मोदी के कार्यक्रम के अगले दिन हुई दो बर्बर हत्याओं का ज़िक्र किया था। इस कार्यक्रम में अभिसार शर्मा ने जैसे ही प्रधानमंत्री का नाम लिया, वैसे ही न्यूज़रूम में खलबली मच गयी और एबीपी न्यूज़ नेटवर्क के सीईओ अतिदेब सरकार ने फौरन इस कार्यक्रम को बंद करने को कहा |

इसके बाद ABP न्यूज़ के प्रबंधन ने उनसे कहा कि उन पर 15 दिन की रोक रहेगी । बताया जा रहा है कि ऐसे निर्देश कथित तौर पर चैनल के सभी एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसरों को दिए गए कि अब से मोदी की आलोचना करता कोई भी कंटेंट प्रसारित नहीं होगा। इस मामले के बाद अभिसार शर्मा ने सितम्बर 2018 में अपने इस्तीफ़े का ऐलान कर दिया।

अभिसार शर्मा और पुण्य प्रसून बाजपेयी दोनों का इस्तीफ़ा उनकी केन्द्र सरकार की नीतियों की आलोचना और उनके दावों की पोल खोलने से जुड़ा है।

  • क्या पुण्य प्रसून और अभिसार शर्मा निजी तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दुश्मनी रखते हैं? या बीजेपी के अलावा किसी अन्य पार्टी को सपोर्ट करते हैं?
  • या खुद की TRP बढ़ाने के मकसद से ख़बर को सनसनीखेज बनाकर पेश करते हैं ?
  • क्या सरकार ने न्यूज़ चैनल द्वारा सच बाहर आ जाने से घबराकर ABP न्यूज़ प्रबंधन पर दबाव बना कर इनको इस्तीफ़ा देने को मजबूर किया है ?

ये फ़ैसला आपकी समझ पर है कि आप मोदी सरकार पर भरोसा करते हो कि न्यूज़ चैनल की निष्पक्षता पर?

आपके पास दो विकल्प हैं या तो चैनल मालिक के दिशा निर्देशों को मानिये, अन्यथा आप अपने उसूलों पर ज़िन्दगी जी सकते है। और पुण्य प्रसून बाजपाई और अभिसार शर्मा बन सकते हैं ।