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 मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान|google
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मध्य प्रदेश को किसके सहारे छोड़ गए ‘मामा’ शिवराज

मध्य प्रदेश के सियासत में बीते डेढ़ दशक तक चमकने वाले सितारे शिवराज, प्रदेश की राजनीत छोड़ केंद्र की राजनीत शामिल में रहे हैं।

AKANKSHA MISHRA

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भोपाल: भारतीय जनता पार्टी मध्य प्रदेश में अपनी सत्ता गवा चुकी है। बीते डेढ़ दशक तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान अब पूर्व मुख्यमंत्री बन चुके है। उनकी जगह कमलनाथ ने ले ली है। सत्ता छिनने का मलाल तो शिवराज को रहा होगा लेकिन उससे भी अधिक दुख शिवराज को प्रदेश की राजनीती छोड़ने का रहेगा।

पूर्व मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश की सियासत में सक्रिय रहना चाहते थे। जिसका उदारहण उन्होंने विधानसभा चुनाव में बीजेपी की हार के बाद तुरंत दे दिया था। कमलनाथ के मुख्यमंत्री बनते ही शिवराज चुप-चाप हार मान कर नहीं बैठ गए उन्होंने अपने क्षेत्रों का दौरा जारी रखा लोगों से मिलते रहे। पार्टी की हार का जिम्मा लेने के बाद शिवराज ने अपने पहले ही बयान में साफ तौर पर ऐलान किया था, "मैं केंद्र में नहीं जाऊंगा, मध्य प्रदेश में जिऊंगा और मध्य प्रदेश में ही मरूंगा।"

मुख्यमंत्री आवास छोड़ने के अपने आखिरी दिनों में लोगों से मिलते हुए शिवराज भावुक हो उठे, उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा था, "आप लोग चिंता न करें, क्योंकि टाइगर अभी जिंदा है।"

लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज के इस बयान को अभी एक माह का वक्त भी नहीं गुजरा था कि उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय होने का बुलावा मिल गया है। शिवराज से मध्य प्रदेश की कमान छिन ली गई।

दरअसल शिवराज चाहते थे कि वे खुद नेता प्रतिपक्ष या अपने चहेते को यह जिम्मदारी दिला दें। मगर ऐसा हुआ नहीं। शिवराज को प्रदेश की सियासत से दूर कर कर दिया गया और कभी शिवराज के खिलाफ सीधी बगावती तेवर अदावत रखने वाले गोपाल भार्गव को नेता प्रतिपक्ष बना दिया गया।

शिवराज को बीजेपी का उपाध्यक्ष बना दिया गया। पार्टी चाहती है कि शिवराज अब अपना ध्यान लोकसभा चुनाव पर केंद्रित करें। पार्टी अब पूरी तरह शिवराज को केंद्र की राजनीति में ले जाने का मन बना चुकी है, जो शिवराज की मर्जी के विपरीत है।

बीजेपी के कुछ नेताओं की माने तो पार्टी ने शिवराज को बड़ी जिम्मेवारी दी है। लेकिन शिवराज की मंशा कुछ और ही है और वे हमेसा इसे जाहिर भी करते रहे हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ना चाहते। लेकिन अब हवा का रुख बदल चूका है , विधानसभा में हार के बाद हालात बदल गए है। मुख्यमंत्री रहते हुए शिवराज ने कई ऐसे फैसले लिए थे जो पार्टी को रास नहीं आए, और अब पार्टी उनके फैसले को भी मानने के मूड में नहीं हैं। इन हालातों को देखकर यही लगता है कि आने वाले दिनों में बीजेपी के लिए शिवराज और शिवराज के लिए काफी महत्वपूर्ण होने वाले हैं।