उदय बुलेटिन
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ban in india
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क्या आपको लगता है कि भारत में इन चीज़ो को प्रतिबंधित कर देना चाहिए?

कुछ ऐसी चीज़ें जिससे इस देश और देसवासियों का कोई फायदा नहीं  

Abhishek

Abhishek

हम हिन्दुस्तानियों को प्रतिबंध लगाने में बड़ी रुचि है, जब की हमें जहां प्रतिबंध लगाना चाहिए वहां नहीं लगाते। प्रगति क्षेत्र से दूर आज तक हम लोग धर्म, वेश, भाषा, राजनीति यही सब में उलझे हुए हैं। हमसे अलग सोच रखने वाली कुछ बातों पर प्रतिबंध लगता है तो हमें मजा आता है पर बताइए, प्रतिबंध लगाने से क्या कुछ फायदा हुआ है?

पिछले साल भारत में पायरेसी रोकने हेतु, सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किए जाने वाली साइट “ टोरंट ” को भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया। लेकिन अभी टॉरेंट के जगह और टोरेन्ट जैसी कई और साइट आ गयी वीडियो डाउनलोड करने के लिए।

तो क्या प्रतिबंध से इस समस्या का हल निकल पाया? नहीं।

वैसे ही कुछ दिन पहले बहुत ज़ोर से प्रतिरोध उठा था जब पोर्न पर प्रतिबंध लगाने की बात आई थी। अगर प्रतिबंध लगता भी, तो vpn इस्तेमाल करके लोग चोरी छिपे देखते।

नशा, तथा ड्रग्स पर प्रतिबंध लगना चाहिए, पर आयकर के नाम से इन सब पर कोई रोक नहीं लग रहा। बिहार में अभी दारू पर प्रतिबंध है। मगर लोग वहां सिलिंडर के अंदर छिपा कर दारू बेच रहे हैं ।

बात यह है, की लोगों को जो करना है वह करेंगे, जब तक खुद फंस कर सीख न पाएं। प्रतिबंध जितना भी लगाया जाए, उसमे कोई बड़ा परिवर्तन नहीं आने वाला, क्योंकि मानसिकता बदलने से ही चीजें बदलती है, प्रतिबंध लगाने से नहीं।

अब ऊपर दिए गए मुद्दों पर विस्तार से बात करते हैं और इन तीन चीजों पर सरकार को सख्त कदम उठाकर प्रतिबन्ध लगा देना चाहिए!

  • नशीले पदार्थ:

भले ही वो शराब हो या ड्रग्स, हर नशीला पदार्थ मानव शरीर को अंदर से खोखला कर देता है। मैंने अपने छात्र जीवन में कई अत्यधिक मेधावी दोस्तों को ड्रग्स और शराब के चक्कर में कई बार फेल होते देखा है। इसी प्रकार मैंने अपने कुछ रिश्तेदारों को शराब के कारण जान से हाथ धोते देखा है। इसलिए सार्वजनिक भलाई के हिसाब से मैं नशीले पदार्थ पर प्रतिबन्ध लगाने के पक्ष में हूँ।

वैज्ञानिक रूप से भी हमें ये पता चलता है कि नशा कितना घातक है। आप किसी भी डॉक्टर के पास जाइये और वह नशे को छोड़ने की सलाह देगा। फिर भी, अनियंत्रित इंद्रियों के कारण हम इतनी सारी प्राणघातक आदतों में लिप्त हैं।

  • गाली देना:

मैं मानता हूँ की ऐसा प्रतिबन्ध पूर्णतः संभव होना मुश्किल है लेकिन अपशब्द हमारे मानस पटल पर गहरा प्रभाव डालते हैं। जाने या अनजाने में ऐसे शब्द हमारे मन में आक्रामकता एवं कुंठित विचारों को जन्म देते हैं। तो मेरा मानना है कि हमें गाली देने पर प्रतिबन्ध लगा देना चाहिए।

वैसे भी, एक सभ्य समाज उसकी भाषा से जाना जाता है। अगर हम बिना किसी कारण के अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं तो कहीं न कहीं यह हमारे समाज के अंदर फैली असभ्यता को दिखाता है। यह ये दर्शाता है कि भले ही हम कितने ही पढ़ लिख न जाएं, लेकिन हम जबान पर काबू करने जैसी साधारण क्रिया करने में असमर्थ हैं।

  • पॉर्न फिल्में:

जिस तरह गालियाँ हमारे मन में कुंठित विचार लाती हैं, उसी प्रकार पॉर्न फिल्में भी हमारे मन में अत्यधिक काम वासना का प्रसार करती हैं। भले ही कई भद्र जन यह तर्क दें कि हम तो पॉर्न को देख कर भुला देते हैं और उसे सच की तरह नहीं लेते हैं, लेकिन भारत की कम पढ़ी लिखी जनता, खासतौर पर युवा वर्ग, ऐसा नहीं सोचता। पॉर्न बनाने के पीछे का सिद्धांत ही मनुष्य को काम वासना की तरफ भेजना है ताकि बड़ी बड़ी कंपनियाँ paid subscription के नाम पर जनता से पैसे ऐंठे।

जब निर्भया कांड हुआ था तब सारा देश आँखों में आंसू लिए खड़ा था। लेकिन हमने उस घटना के बाद उसके पीछे के तथ्यों को जानने का प्रयास नहीं किया। 2016 में जब एक documentary आयी तब हमें पता चला की बलात्कारियों ने यह सब अत्यधिक नशे और पॉर्न के प्रभाव में किया। तो क्यों ना हम समस्या की जड़ को ही मिटा दें, ताकि हमारी माँ-बहनें सुरक्षित रहें?

मेरे अनुसार, अगर हम ऊपर लिखी बुरी आदतों पर काबू पा लें तो ज़रूर एक बेहतर भारत बना सकते हैं।यह मेरा नजरिया है, आपका कुछ और हो सकता है जिन लोगों को मेरी बातें पसंद नहीं आयी हैं, मैं उनसे अभी क्षमा मांग लेता हूँ।


समस्याएं और भी हैं जिनके बारे में अगली स्टोरी में चर्चा करेंगे!